“दृढ़ संकल्प और मानसिक शक्ति के आगे कोई भी दूरी बड़ी नहीं होती।” इस बात को सच कर दिखाया है सिलवासा के प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अमोल पटेल ने। 47 वर्ष की आयु में अपनी व्यस्त दिनचर्या और पेशेवर प्रतिबद्धताओं के बावजूद, उन्होंने 14 जून 2026 को दक्षिण अफ्रीका में आयोजित दुनिया की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित अल्ट्रा मैराथन—’कॉमरेड्स मैराथन’ को सफलतापूर्वक पूरा कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
इस ऐतिहासिक दौड़ को पूरा करके वे दक्षिण अफ्रीका में यह उपलब्धि हासिल करने वाले सिलवासा के दूसरे नागरिक बन गए हैं।
मात्र 9 घंटे 46 मिनट में जीती ‘अल्टीमेट ह्यूमन रेस’ ‘अल्टीमेट ह्यूमन रेस’ के नाम से मशहूर इस मैराथन में दुनिया भर से लगभग 22,000 धावकों ने भाग लिया। डरबन से पीटरमैरिट्जबर्ग के बीच लगभग 1700 मीटर की कठिन ऊंचाई और पहाड़ियों से गुजरी इस 86 किलोमीटर की दौड़ को डॉ. अमोल ने सुबह 5 बजे शुरू किया और 9 घंटे 46 मिनट 47 सेकंड के शानदार समय में पूरा कर लिया। 12 घंटे की अनिवार्य समय सीमा से काफी पहले दौड़ पूरी करने पर उन्हें प्रतिष्ठित ‘रॉबर्ट मितशाल पदक’ से सम्मानित किया गया।

कड़ा अनुशासन और 6 महीने की घोर तपस्या श्री चंद्रकांत पटेल एवं श्रीमती मधुकांता पटेल के पुत्र डॉ. अमोल पटेल सिलवासा स्थित नोवा अस्पताल में एक पूर्णकालिक ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं। एक सर्जन की बेहद चुनौतीपूर्ण और थका देने वाली कार्यशैली के बावजूद, उन्होंने पिछले छह महीनों तक अत्यंत अनुशासन के साथ कड़ी मेहनत की।
तैयारी के कुछ मुख्य अंश:कुल रनिंग: तैयारियों के 6 महीनों में उन्होंने कुल 1,635 किलोमीटर की दौड़ लगाई। लंबी दौड़ का अभ्यास: फरवरी से मई के बीच 50 किमी, 56 किमी, 65 किमी और 58 किमी की मैराथन पूरी की। कठिन रास्तों पर ट्रेनिंग: कॉमरेड्स मैराथन की तैयारी के लिए उन्होंने लोनावला, गणपतिपुले, नासिक, पुणे और विल्सन हिल्स की दुर्गम पहाड़ियों पर रात के समय दौड़ने का अभ्यास किया। फिट इंडिया अभियान: भारत सरकार के ‘फिट इंडिया’ अभियान से प्रेरित होकर वे प्रतिदिन 8-10 किमी साइकिल चलाकर अपने अस्पताल (कार्यस्थल) जाते थे और नियमित रूप से जिम में भी पसीना बहाते थे। जीत का सिलसिला और अपनों का साथ

डॉ. अमोल सिलवासा, वापी और वलसाड की कई दौड़ प्रतियोगिताओं में लगातार जीत हासिल करते रहे हैं। इसी वर्ष मार्च में उन्होंने गणपतिपुले में आयोजित 56 किमी अल्ट्रा मैराथन में भी खिताबी जीत दर्ज की थी। एमएस (मेडिकल) के दिनों में स्वर्ण पदक विजेता रहे डॉ. अमोल की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनकी पत्नी डॉ. कोमल पटेल (नोवा अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ) और बेटी तृषा बेहद गौरवान्वित हैं।
मरीज के लिए बने मसीहा और प्रेरणास्रोत पिछले साल सिलवासा की गृहिणी नेहा रंजन ने इस 90 किमी की कॉमरेड्स मैराथन को पूरा किया था। इस साल भी वे भाग लेने वाली थीं, लेकिन सिलवासा में एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में उनके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। खास बात यह है कि मार्च में डॉ. अमोल ने ही उनकी फ्रैक्चर सर्जरी की थी। चोट के इस मानसिक रूप से कठिन दौर में डॉ. अमोल ने नेहा को लगातार प्रेरित किया। नेहा रंजन और सिलवासा के सभी धावक मित्रों ने डॉ. अमोल की इस उत्कृष्ट उपलब्धि पर अपनी गहरी खुशी व्यक्त की है।
युवाओं के लिए संदेश: उम्र तो बस एक नंबर है 47 वर्ष की आयु में भी भरपूर ऊर्जा से लबरेज डॉ. अमोल पटेल ने यह साबित कर दिया है कि यदि आपमें कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो उम्र और जिम्मेदारियां कभी बाधा नहीं बनतीं। दैनिक जीवन में अनुशासन और फिटनेस ही एक सुखी और स्वस्थ जीवन की असली कुंजी है।
उनकी यह अद्वितीय सफलता निश्चित रूप से आज के युवाओं और समाज के हर वर्ग के लिए एक महान प्रेरणा है। इस शानदार गौरव के लिए डॉ. अमोल पटेल को ढेर सारी शुभकामनाएं!


